कबड्डी जगत को एक और बड़ा झटका! इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी सुखा बेहलेवाला का निधन
हाल ही में पंजाब के मशहूर कबड्डी प्लेयर गुरजीत टूट एक भयानक बीमारी की वजह से अपने रोते-बिलखते परिवार को छोड़कर दुनिया से चले गए थे। अब उनके साथी, फरीदकोट जिले के मशहूर इंटरनेशनल कबड्डी प्लेयर सुखजिंदर सिंह सुखा बेहले वाला, जो कभी कबड्डी कोच गुरदीप सिंह मल्ही के पसंदीदा प्लेयर थे, भी एक भयानक लिवर की बीमारी की वजह से दुनिया को अलविदा कह गए हैं। अब उनके परिवार में उनकी बीमार बूढ़ी मां और मुश्किल से 6 और 4 साल के दो छोटे बच्चे बचे हैं। लंबी बीमारी की वजह से घर में बहुत गरीबी है और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी अब बूढ़ी और बीमार मां के सिर पर आ गई है।
बात करते हुए गांव के लोगों ने बताया कि एक समय था जब पंजाब के हर गांव के स्पोर्ट्स फेस्टिवल में सुखा बेहले वाला का नाम लिया जाता था और सुख की रेड पर नोटों की बारिश होती थी। गांव वालों ने बताया कि सुखा ने आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में युवाओं को स्पोर्ट्स से जोड़ा था। लेकिन पता नहीं कब उन्हें लिवर की भयानक बीमारी हो गई, जिसकी वजह से उनका स्पोर्ट्स छूट गया। महंगे इलाज और खर्चों की वजह से जब परिवार की हालत खराब हुई तो उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई। किसी तरह बूढ़ी मां ने अपने बेटे और उसके छोटे बच्चों का पालन-पोषण किया।
लेकिन हाल ही में पैसों की तंगी और बीमारी और बढ़ गई और सुखा बिहलेवाला इस दुनिया को अलविदा कह गया। गांव वालों ने बताया कि सुखा की मां भी बीमार रहती है और उसके दो ऑपरेशन हो चुके हैं। घर में पैसे कमाने वाला कोई नहीं है, सुखा के 2 छोटे बच्चे हैं, जिसमें एक 6 साल की बेटी और एक 5 साल का बेटा है। अब उन्हें पालने की जिम्मेदारी भी सुखा की बूढ़ी मां के सिर पर है। गांव वालों ने समाज सेवी संस्थाओं, कबड्डी क्लबों और पंजाब सरकार से अपील की कि इस परिवार को आर्थिक मदद दी जाए ताकि इस मशहूर खिलाड़ी का परिवार बर्बाद होने से बच सके।
इस मौके पर बोलते हुए सुखजिंदर सिंह सुखा बिहले वाला की मां ने कहा कि सुखा ने स्कूल टाइम से ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। घर में खुला खाना-पीना था जिसकी वजह से वह बहुत हैंडसम नौजवान बन गया और कुछ ही समय में पूरे इलाके के खेल मेलों में उसका नाम होने लगा। उसने बताया कि सुखे अपने आस-पास के गांवों के नौजवानों को कबड्डी खेलने के लिए कहता था और अक्सर उनकी मदद भी करता था। मां ने बताया कि लेकिन चंद्री को लिवर की ऐसी बीमारी हो गई कि सारी जमा-पूंजी उसके इलाज में खर्च हो गई लेकिन उसका बेटा नहीं बचा। मां ने भारी मन से कहा कि अब घर में कमाई का कोई ज़रिया नहीं है, सुखे के 2 बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी, दोनों की सारी ज़िम्मेदारी अब उस पर आ गई है, लेकिन वह खुद बीमार रहती है, इसलिए वह सरकार, समाज सेवी और कबड्डी क्लब से गुज़ारिश करती है कि मेरे बच्चे के बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें और परिवार की मदद करें।