पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन
भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 12 मई 2026 को बेंगलुरु में "पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने" विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत सरकार देश में स्वच्छ परिवहन के लिए एक आधुनिक और विश्वसनीय ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना शहरी और ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (परिवहन) को किफायती, भरोसेमंद और व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।
माननीय मंत्री ने कर्नाटक के 1,243 ईवी चार्जर्स के प्रस्तावों को 123.26 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृति देने की घोषणा की। अब तक, विभिन्न राज्यों और सीपीएसई में 4,874 ईवी चार्जर्स की स्थापना के लिए कुल 503.86 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाले ईवी चार्जिंग प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। स्वीकृत प्रस्तावों में एचपीसीएल, आईओसीएल और बीपीसीएल जैसे बड़े सीपीएसई के साथ-साथ राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य भी शामिल हैं।
भारी उद्योग मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. हनीफ़ कुरैशी ने कहा कि पीएम ई-ड्राइव पहल पूरे भारत में एक निर्बाध और भविष्योन्मुखी ईवी चार्जिंग नेटवर्क की नींव रख रही है। भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक-तिपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक-कारों, इलेक्ट्रिक-बसों और इलेक्ट्रिक-ट्रकों के लिए ईवी चार्जर्स को सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र, राज्यों, बीएचईएल, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स और उद्योग के हितधारकों के बीच समन्वित प्रयास एक प्रभावी चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास के अगले चरण को समर्थन देने में सक्षम होगा।
पीएम ई-ड्राइव के अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है। इनमें पीएलआई ऑटो (25,938 करोड़ रुपये), पीएलआई एसीसी (18,100 करोड़ रुपये), भुगतान सुरक्षा तंत्र (3,435 करोड़ रुपये) और रेर अर्थ मैग्नेट योजना (7,280 करोड़ रुपये) शामिल हैं।
यह सम्मेलन देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में तेजी लाने और भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित हुआ। इस सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स, ईवी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम), तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), ऑटोमोबाइल उद्योग संघों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।
इस सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों में तेलंगाना सरकार के विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री नवीन मित्तल (आईएएस), केरल सरकार के अपर मुख्य सचिव (विद्युत) श्री पुनीत कुमार (आईएएस), केरल सरकार के केएसईबी के सीएमडी श्री मिन्हाज आलम, कर्नाटक सरकार के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री गौरव गुप्ता और ओडिशा सरकार के परिवहन आयुक्त श्री अमिताभ ठाकुर शामिल थे। इन अधिकारियों ने ईवी चार्जिंग के विस्तार और चार्जिंग की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए अपने अनुभव, नीतिगत पहलों और राज्य-स्तरीय रणनीतियों को साझा किया।
PM ई-ड्राइव योजना के तहत, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और कई क्षेत्रों में ईवी इकोसिस्टम के विकास में मदद करने के लिए कुल 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। यह योजना विभिन्न वाहन श्रेणियों और उनसे जुड़े पार्ट्स के लिए डिमांड इंसेंटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देती है। इस योजना के तहत, लगभग 24.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों और लगभग 3.16 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स—जिनमें ई-रिक्शा, ई-कार्ट और एल5 श्रेणी के वाहन शामिल हैं—को सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इस योजना में 14,028 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए 4,391 करोड़ रुपये की सहायता देने की भी परिकल्पना की गई है। वाणिज्यिक और सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रकों के लिए भी खास सपोर्ट शामिल किया गया है।
कुल परिव्यय में से, 3,679 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिक दोपहिया, इलेक्ट्रिक तिपहिया, इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक-ट्रक और इलेक्ट्रिक वाहनों की अन्य उभरती श्रेणियों के लिए डिमांड इंसेंटिव हेतु निर्धारित किए गए हैं।
देश भर में ईवी पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इस सम्मेलन में देश भर में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, इंटरऑपरेबिलिटी, मानकीकरण और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, ओएमसी, ओईएम, सीपीओ और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के महत्व पर ज़ोर दिया गया। प्रतिभागियों ने भारत के तेजी से बढ़ते ईवी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए तेजी से तैनाती, सामान्य तकनीकी मानकों और बेहतर सार्वजनिक-निजी भागीदारी की जरूरत पर प्रकाश डाला।
भारी उद्योग मंत्रालय ने राज्यों और हितधारकों को ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को समय पर कार्यान्वित करने में सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह भारत के स्वच्छ परिवहन की दिशा में बदलाव में तेजी लाने, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने, और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।