केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में FCRA 2.0 पोर्टल एवं e-OCI कार्ड का शुभारंभ किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में FCRA 2.0 पोर्टल एवं e-OCI कार्ड का शुभारंभ किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में FCRA 2.0 पोर्टल एवं e-OCI कार्ड का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव और निदेशक, आसूचना ब्यूरो सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हुई दोनों नई शुरुआत नागरिकों की सहूलियत बढ़ाने में बहुत लाभकारी सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई दोनों पहल नागरिकों की सुविधाएँ बढ़ाएंगी और विशेष रूप से एफसीआरए पोर्टल से दान प्राप्त करने वालों की दिक्कतों का निवारण होगा। उन्होंने कहा कि 2014 में जब श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार “Minimum Government, Maximum Governance” के सिद्धांत पर काम करेगी। श्री शाह ने कहा कि जब नीयत साफ हो, नीति स्पष्ट हो और तकनीक को स्वीकारने की मानसिकता तो सभी प्रकार का शासन ईमानदार लोगों के लिए बहुत सरल हो जाता है, गलत करने वालों पर पैनी निगरानी की व्यवस्था होती है और देश को अधिक से अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

अमित शाह ने कहा कि 2014 से पहले FCRA की व्यवस्था फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझी हुई और निगरानी से परे थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इसे मजबूत किया गया और आज एफसीआरए पोर्टल का नवीनीकरण, संगठनों के लिए सरलता को बहुत बढ़ा देगा। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में आवेदनों की संख्या और दान के प्रवाह में काफी वृद्धि हुई है, जिसे देखते हुए कागजी कार्यवाही में कमी लाना और विदेशी अंशदान पर रियल टाइम प्रभावी निगरानी देश की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि FCRA के कानून के कारण गलत उद्देश्यों से आने वाले विदेशी अंशदान पर निगरानी बढ़ेगी। श्री शाह ने कहा कि आज शुरू हुई इस प्रणाली के माध्यम से भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और ई-साइन आधारित प्रमाणीकरण, ओसीआर (OCR), और एनजीओ दर्पण बैंक विवरण प्रणाली जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि यह सारा डेटा 'मेघराज' (Government Cloud) पर होस्ट होने से डेटा चोरी की संभावनाएँ बहुत कम हो जाती हैं। इसके साथ ही, अगले कुछ महीनों में एफसीआरए मोबाइल एप्लीकेशन, AI संचालित चैटबॉट और बैंकों के लिए एक समर्पित ऑनलाइन डैशबोर्ड भी शुरू किया जाएगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज ई-ओसीआई (e-OCI) कार्ड का भी शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि ओसीआई प्रणाली में आने वाली शुरूआती समस्याओं को इस प्रणाली में दूर कर दिया गया है और इस प्रणाली से 50 लाख से अधिक ओसीआई कार्डधारकों को बहुत सरलता होगी। 20 वर्ष के बाद नया पासपोर्ट जारी होने पर ओसीआई बुकलेट को पुनः जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी और कार्डधारकों की पंजीकरण संख्या भी unique हो जाएगी। इसी प्रकार, डिजिटल ओसीआई कार्ड होने के बाद दस्तावेज खोने या क्षतिग्रस्त होने की समस्या भी समाप्त हो जाएगी और कार्डधारक स्वयं रियल टाइम सत्यापन कर पाएंगे। 

एफसीआरए 2.0 पोर्टल

एफसीआरए 2.0 पोर्टल को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के अंतर्गत अनुपालन को सरल बनाने तथा निगरानी एवं प्रवर्तन की व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए विकसित किया गया है। आवेदन, नवीनीकरण, वार्षिक विवरणी और अन्य सेवाओं से जुड़ी सभी प्रमुख प्रक्रियाएँ अब पूर्णतः डिजिटल (एंड-टू-एंड) कर दी गई हैं। वर्तमान में देश भर में लगभग 14,500 सक्रिय एफसीआरए संगठन कार्यरत हैं, और प्रतिवर्ष लगभग 15,000 से 20,000 आवेदन तथा करीब 17,000 वार्षिक विवरणियाँ प्राप्त होती हैं — इतनी बड़ी संख्या के कारण एक आधुनिक, तकनीक-सक्षम और सुरक्षित व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नेशनल गवर्नमेंट क्लाउड (मेघराज) पर होस्ट किए गए इस पोर्टल में प्रक्रिया पुनर्संरचना, एकीकृत डैशबोर्ड, आधार-आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन सुविधा और ओसीआर-आधारित दस्तावेज़ विश्लेषण जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। नए एफसीआरए संशोधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों को भी इसमें समाहित किया गया है, और यह पोर्टल पैन, आधार, ओसीआई, एनजीओ दर्पण तथा आईसीएआई की यूडीआईएन प्रणाली समेत प्रमुख सरकारी डेटाबेस तथा बैंक से एकीकृत है।

संगठनों के लिए यह पोर्टल कागज़ी कार्यवाही को कम करता है, समय बचाता है और एक सरल व अधिक सुविधाजनक अनुभव देता है, जिसमें आवेदनों की तेज़ प्रोसेसिंग और एक एकीकृत, लॉगिन-आधारित डैशबोर्ड शामिल है। सरकार के लिए, प्रमुख डेटाबेस के साथ एपीआई-आधारित एकीकरण से सत्यापन तेज़ और अधिक सटीक होता है, अनुपालन निगरानी बेहतर होती है, तथा विदेशी अंशदान की प्राप्ति और उपयोग पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित होती है — जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सुशासन दोनों समान रूप से मज़बूत होते हैं। इस मंच को भविष्य में एआई-सक्षम चैटबॉट और मोबाइल-आधारित पहुँच जैसी सुविधाओं को समाहित करने के अनुरूप भी तैयार किया गया है।

 ई-ओसीआई कार्ड

इलेक्ट्रॉनिक ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ इंडिया (ई-ओसीआई) कार्ड एक प्रमुख नागरिक-केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य पूर्णतः डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए ओसीआई सेवाओं को रूपांतरित करना है। इस प्रणाली के तहत आवेदक पूरी ओसीआई प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकते हैं — आवेदन प्रस्तुत करना, सहायक दस्तावेज़ अपलोड करना और स्वीकृति के बाद डिजिटल रूप से तैयार कार्ड डाउनलोड करना — जबकि मौजूदा कार्डधारक अधिकांश मामलों में नए आवेदन या भौतिक सत्यापन के बिना ही अपना ई-ओसीआई कार्ड डिजिटल रूप से प्राप्त कर सकते हैं। नई व्यवस्था के अंतर्गत, 20 वर्ष की आयु के बाद नया पासपोर्ट बनने पर ओसीआई बुकलेट को पुनः जारी कराने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है; हालाँकि, कार्डधारकों को नया पासपोर्ट जारी होने पर अपने पासपोर्ट संबंधी विवरण ऑनलाइन अद्यतन करना आवश्यक होगा।

आवेदकों के लिए यह प्रणाली एक सुविधाजनक, पूर्णतः डिजिटल अनुभव प्रदान करती है, जिसमें किसी भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होती, मोबाइल उपकरणों के माध्यम से कभी भी पहुँच संभव है, और डिजिटल जारी करने से प्रोसेसिंग तेज़ होती है; साथ ही यह भौतिक दस्तावेज़ों से जुड़े खोने या क्षतिग्रस्त होने के जोखिम को समाप्त करती है और आव्रजन में तेज़ी से मंज़ूरी देकर यात्रा को सुगम बनाती है। सरकार के लिए, ई-ओसीआई प्रणाली पूर्णतः ऑनलाइन प्रोसेसिंग सुनिश्चित करती है, कागज़ी कार्यवाही और प्रशासनिक लागत को कम करती है, डेटा प्रबंधन और केंद्रीकृत ट्रैकिंग को मज़बूत करती है, तथा हवाई अड्डों पर वास्तविक समय में सत्यापन हेतु डिजिटल आव्रजन प्रणालियों से एकीकृत होती है — जिससे पहचान का सत्यापन बेहतर होता है, सुरक्षा बढ़ती है और धोखाधड़ी का जोखिम कम होता है।

एफसीआरए 2.0 पोर्टल और ई-ओसीआई कार्ड का शुभारंभ, बेहतर शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए तकनीक का उपयोग करने की गृह मंत्रालय की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो एक अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल रूप से सशक्त शासन व्यवस्था के निर्माण में योगदान देता है।