खनौरी बॉर्डर पर किसान ने लगाई फांसी, पहले दिन से ही आंदोलन में था शामिल, डल्लेवाल ने कहा-संघर्ष को समर्पित था किसान
हरियाणा-पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर लगे किसान धरने से एक बुरी ख़बर बुधवार को आई। यहां एक किसान ने आत्महत्या कर ली। उसकी मृतक देह टैंट में मिली। मृतक किसान का नाम गुरमीत सिंह बताया जा रहा है वो पंजाब के मानसा जिले का रहने वाला था।
मिली जानकारी के मुताबिक गुरमीत सिंह भारतीय किसान यूनियन सिद्धपुर से जुड़ा हुआ था। गुरमीत ने सुसाइड तब किया जब वहां पर कोई भी अन्य किसान मौजूद नहीं था। कहा जा रहा है कि बुधवार की सुबह करीब पौने 10 बजे उसने गांव मल्लां ब्लॉक डोडा श्री मुक्तसर साहिब के टैंट में जाकर आत्महत्या की।

जब किसान टैंट में लौटकर आए तो गुरमीत फांसी लगाए हुए पाया। बताया जा रहा है कि गुरमीत ने रस्सी को ट्रॉली से बांधा था और उसी में अपनी गर्दन फंसाकर लेटा हुआ था।
गुरमीत की मौत के बाद किसानों ने बताया कि गुरमीत इस आंदोलन को लेकर काफी गंभीर था। और बहुत कम घर जाता था। किसानों का कहना है कि उसके सिर पर कर्ज भी था। इस वजह से वह परेशान था। किसानों ने बताया कि कुछ समय पहले उसके बेटे की शादी थी वो उसमें भी शामिल होने नहीं गया था। गुरमीत मोर्चे पर लाइट की व्यवस्था देखता था।
वहीं मामले में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि मुझे सूचना मिली है कि किसान ने सुसाइड किया है। उन्होंने कहा कि मैं चंडीगढ़ आया हुआ था और अब मौके पर जा रहा हूं। उन्होंने बताया कि ये किसान संघर्ष को लेकर काफी समर्पित था। सारे धरना स्थल पर बिजली का काम वही देखता था।

आपको बता दें कि फसलों के एमएसपी को लेकर पंजाब के किसान फरवरी 2024 से आंदोलन कर रहे हैं ये किसान दिल्ली कूच के लिए निकले थे लेकिन हरियाणा सरकार ने इन्हें शंभू और खन्नौरी बॉर्डर पर ही रोक लिया। जहां पुलिस ने किसानों पर खूब आंसू गैस के गोले दागे लाठीचार्ज किया इतना ही नहीं खन्नौरी बॉर्डर पर पुलिस की ओर से की गई गोलीबारी में एक किसान युवक की मौत भी हो गई थी। जिसके चलते किसानों ने शंभू और खन्नौरी बॉर्डर पर ही पक्का मोर्चा लगा दिया था।
पक्के मोर्चे की वजह से अंबाला के व्यापारी भी परेशान हो रहे हैं जिस कारण उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में मामले को लेकर याचिका दायर की जिस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बॉर्डर खोलने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकार से किसानों और केंद्र के बीच बातचीत के लिए एक्सपर्ट लोगों के नाम लिए। साथ ही महिलाओं-बच्चों, बुजुर्गों और एंबुलेंस के लिए बॉर्डर आशिंक रूप से या सिंगल लेन खोलने के लिए कहा। अब तक इस मामले में पंजाब, हरियाणा के अधिकारियों और किसानों की दो बैठकें हो चुकी हैं। जिसमें हरियाणा पुलिस का कहना है कि किसान बिना ट्रैक्टर दिल्ली जाएं, लेकिन किसान ट्रैक्टर समेत जाने पर अड़े हैं। बस इसी वजह से बॉर्डर की एक लेन भी नहीं खुल पा रही है।